प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना
प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना क्या है?

केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित प्रायोगिक योजना का 50 प्रतिशत से ज्यादा आबादी संकेन्द्रण वाले अनुसूचित गावों के एकीकृत विकास के लिए कार्यान्वयन किया जा रहा है। भारत सरकार ने 2009-10 में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना लांच किया था। शुरुआत में यह योजना 5 राज्यों अर्थात बिहार,हिमांचल प्रदेश, राजस्थान,असम और तमिलनाडु के 1000 गावों में प्रायोगिक आधार पर प्रारम्भ की गयी थी।

बाद में इस योजना को 22 जनवरी 2015 को संशोधित करते हुएउत्तरप्रदेश,पंजाब,उत्तराखंड,असम,पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश,ओड़िशा झारखण्ड,छत्तीसगड़,आँध्रप्रदेश,तेलंगाना और हरियाणा के 1500 अनुसूचित जाती बाहुल्य गावो में विस्तारित किया गया।

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना का उद्देश्य

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना का उद्देश्य का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाती बाहुल्य का एकीकृत विकास करना है। इस योजना को शुरू करने का उद्देश्य गरीबी काम करना है।

  • प्राथमिक रूप से,संगत केंद्रीय योजनाओ के अभिसरण क्रियान्वयन के द्वार
  • इन गावों को अन्तरालपूर्तिनिधि के रूप में केंद्रीय सहायता औसतन 20 लाख रूपये प्रति गांव प्रदान करना , जिसमे 5 लाख रूपये तक की राशि प्रदान की जा सकती है।
  • कार्यकलापों को आरम्भ करने के लिए अन्तरालपूर्ति घटक की उपलब्धता करना , जो केंद्र और राज्य सरकार की माजूदा योजनाओ के तहत कवर नहीं होते और उन्हें ‘अन्तरालपूर्ति’ घटक के अंतर्गत आरम्भ किया जाना हो।

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना का लक्ष्य

  • गरीबी काम करना और 3 वर्ष के भीतर कम से कम 50% तक इसके प्रसारण में कमी।
  • सार्वभौमिक प्रौढ़ साक्षरता।
  • नामांकन और प्रारंभिक चरण में 100 बच्चो का बना रहना।
  • 2012 में शिशु के मृत्युदर में 30 और मातृ मृत्यु दर में 100 तक की कमी।
  • सभी पात्र परिवारों के लिए आईएवाई आवासों का 100 आबंटन
  • बच्चो का पूर्ण टीककरण करने का उद्देश्य
  • सभी गावो को पक्की सड़क से जोड़ना
  • शराब तथा अन्य नशीले पदार्थो पर प्रतिबन्ध
  • बालविवाह और बालश्रम पर प्रतिबंध
  • ग्रामवासियो को सुरक्षित पेयजल सुविधा तक पहुंचना।
  • गर्भवती महिलाओ के लिए 100% संस्थागत प्रसव।

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना

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